
von Pratik Puri
अवंती के अनजान रिश्ते केदार एक व्हिडीओ राधा गोरे को भेजता है जिसमें वो कबूल करता है की खून उसने ही किया है और इसके लिये किसी और को दोषी ना ठहराया जाये. इधर गोरिल्ला को लगता है की बँक फ्रॉड में विकास के साथ अवंती भी शामिल है और वो दोनो केदार को ब्लैकमेल कर रहे है. जाँच से पता चलता है की अवंती एक रहस्मयी शख्स से मिलने जाती थी. तिजारे को यकीन है की वो शख्स और कोई नही, बल्की केदार पाटिल ही है.
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